6,6,6,6,6,6,6,6.... इस टीम ने रच डाला इतिहास, 50 ओवर में खड़ा कर दिया 574 रन स्कोर, दुनियाभर में भारत का नाम किया ऊँचा
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भारतीय घरेलू क्रिकेट में जब भी कोई बड़ा रिकॉर्ड बनता है, तो वह सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे क्रिकेट जगत में उसकी गूंज सुनाई देती है। विजय हज़ारे ट्रॉफी 2025-26 के पहले ही दिन ऐसा ही ऐतिहासिक नज़ारा देखने को मिला, जब प्लेट ग्रुप के एक मुकाबले में बल्लेबाज़ों ने गेंदबाज़ों की हर रणनीति को नाकाम कर दिया।
चौकों-छक्कों की बरसात के बीच एक टीम ने 50 ओवर में 574 रन ठोक दिए और लिस्ट-ए क्रिकेट के इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज कर लिया। यह कारनामा भारतीय क्रिकेट (Bharat) की गहराई और उभरती हुई प्रतिभा का बड़ा प्रमाण बन गया।
50 ओवर में 574 रन बिहार की रिकॉर्डतोड़ बल्लेबाज़ी
प्लेट ग्रुप में बिहार और अरुणाचल प्रदेश के बीच खेले गए इस मुकाबले में बिहार की टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। पावरप्ले के दौरान तेज़ रन गति ने साफ कर दिया था कि बल्लेबाज़ किसी भी हाल में रुकने वाले नहीं हैं। विकेट गिरने के बावजूद रन गति पर कोई असर नहीं पड़ा और हर नए बल्लेबाज़ ने मैदान के चारों ओर शॉट्स खेले।
42 ओवर के भीतर टीम 435 रन के पार पहुंच चुकी थी और इसके बाद रिकॉर्ड टूटना तय था। अंततः 50 ओवर पूरे होते-होते स्कोर 574 रन तक पहुंच गया, जो विजय हजारे ट्रॉफी ही नहीं बल्कि पूरे लिस्ट-ए क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े स्कोरों में शामिल हो गया।
भारत का नाम किया ऊंचा
इस ऐतिहासिक स्कोर की सबसे मजबूत नींव युवा बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी ने रखी। बेहद कम उम्र में उन्होंने जिस आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाज़ी की, उसने सभी को हैरान कर दिया। वैभव ने सिर्फ 36 गेंदों में शतक पूरा किया और लगातार बड़े शॉट्स खेलते हुए गेंदबाज़ों पर पूरी तरह दबाव बना दिया।
84 गेंदों में 190 रन की उनकी पारी में 16 चौके और 15 छक्के शामिल थे। दोहरे शतक के करीब पहुंचकर आउट होने के बावजूद उनकी यह पारी प्लेट ग्रुप के इतिहास की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाएगी।
कप्तान सकीबुल गनी ने रचा नया कीर्तिमान
बिहार की इस ऐतिहासिक पारी को और खास बना दिया कप्तान सकीबुल गनी के रिकॉर्डतोड़ शतक ने। गनी ने महज़ 32 गेंदों में शतक जड़कर भारत की ओर से लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज शतक का नया रिकॉर्ड बना दिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड 35 गेंदों का था, जिसे उन्होंने पीछे छोड़ दिया।
कप्तान के तौर पर उनका यह योगदान सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं था, बल्कि पूरी टीम के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देने वाला साबित हुआ। 574 रन का यह स्कोर भारतीय घरेलू क्रिकेट की ताकत और भविष्य की संभावनाओं को पूरी दुनिया के सामने मजबूती से पेश करता है।
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