टीम इंडिया पर भारी बोझ बन गया हैं ये खिलाड़ी, बल्ले-गेंद दोनों से हो रहा लगातार फ्लॉप
Published - 13 Jan 2026, 05:46 PM | Updated - 14 Jan 2026, 01:06 PM
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Team India: भारतीय क्रिकेट टीम में अक्सर किसी खिलाड़ी का कद उसके पिछले प्रदर्शन से मापा जाता है, लेकिन निरंतरता ही खेल का असली पैमाना है। पिछले कुछ समय से टीम इंडिया (Team India) के एक स्टार ऑलराउंडर के प्रदर्शन को लेकर काफी चर्चा हो रही है।
खेल के तीनों विभागों में माहिर माने जाने वाले इस खिलाड़ी का जादू अब फीका पड़ता नजर आ रहा है। विशेषज्ञों और प्रशंसकों के बीच यह बहस तेज हो गई है कि क्या अब समय आ गया है जब टीम मैनेजमेंट को भविष्य की ओर देखते हुए कड़े फैसले लेने चाहिए।
रविंद्र जडेजा का गिरता ग्राफ Team India के लिए वार्निंग?
रविंद्र जडेजा लंबे समय तक टीम इंडिया (Team India) के सबसे भरोसेमंद ऑलराउंडर रहे हैं, लेकिन हालिया आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। साल 2025 के घरेलू सीजन और हाल ही में संपन्न हुई चैंपियंस ट्रॉफी में जडेजा की गेंदबाजी अपनी धार खोती दिखी है। मिडिल ओवर्स में रन रोकने और विकेट निकालने की उनकी क्षमता, जो कभी भारत की सबसे बड़ी ताकत थी, अब संघर्ष करती नजर आ रही है।
पिछले 10 वनडे मैचों में उनके विकेट लेने की दर काफी कम हुई है और वह बल्लेबाजों को परेशान करने में नाकाम रहे हैं। जडेजा की सटीक लाइन-लेंथ, जिसके लिए वह मशहूर थे, अब उतनी प्रभावी नहीं दिख रही है, जिससे विपक्षी बल्लेबाजों को हाथ खोलने का पूरा मौका मिल रहा है।
बल्लेबाजी में भी फ्लॉप Team India के लिए बढ़ रही मुश्किलें
सिर्फ गेंदबाजी ही नहीं, बल्कि जडेजा की बल्लेबाजी भी टीम के लिए चिंता का विषय बन गई है। एक समय था जब वह निचले क्रम में आकर मैच फिनिशर की भूमिका निभाते थे, लेकिन हालिया सीरीज में उनके बल्ले से रन निकलना बंद हो गए हैं। महत्वपूर्ण मौकों पर तेजी से रन बनाने की जिम्मेदारी जब उन पर आती है, तो वह अक्सर दबाव में अपना विकेट गंवा देते हैं या बहुत अधिक गेंदे बर्बाद कर देते हैं।
टीम इंडिया (Team India) के संतुलन के लिए जडेजा का एक 'प्योर ऑलराउंडर' होना बेहद जरूरी है, लेकिन जब वह न तो गेंद से और न ही बल्ले से योगदान दे पाते हैं, तो टीम में उनकी जगह पर सवाल उठना लाजिमी है। वडोदरा वनडे और न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में भी उनका प्रदर्शन औसत से नीचे रहा, जिसने चयनकर्ताओं की सिरदर्द बढ़ा दी है।
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सुंदर और अक्षर से मिल रही कड़ी टक्कर
जडेजा के लिए मुश्किलें इसलिए भी बढ़ गई हैं क्योंकि बेंच पर बैठे खिलाड़ी जैसे अक्षर पटेल और वाशिंगटन सुंदर लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। अक्षर पटेल ने अपनी बल्लेबाजी और किफायती गेंदबाजी से यह साबित किया है कि वह जडेजा के एक बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। वहीं, सुंदर की युवाओं वाली ऊर्जा और बल्लेबाजी की गहराई टीम को एक नया विकल्प प्रदान करती है।
टीम मैनेजमेंट अब 2027 के वर्ल्ड कप के रोडमैप पर काम कर रहा है, और ऐसे में किसी आउट-ऑफ-फॉर्म सीनियर खिलाड़ी को ढोना भारत के लिए महंगा साबित हो सकता है। यदि जडेजा जल्द ही अपनी लय हासिल नहीं करते हैं, तो वह टीम के लिए एसेट की जगह लायबिलिटी यानी बोझ बन सकते हैं। अब देखना होगा कि राजकोट वनडे में उन्हें मौका मिलता है या टीम कड़े फैसले लेती है।
ऑथर के बारे में
सौरभ भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से रेडियो एंड टेलीविजन पत्रकारिता में उच्च शिक्षा प्राप्... रीड मोर