‘ये गलत है’—पाक खिलाड़ियों के हक में आवाज़ उठाते माइकल वॉन, IPL ऑनर्स को घेरा
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Michael Vaughan: इंग्लैंड में खेली जाने वाली चर्चित फ्रेंचाइज़ी लीग द हंड्रेड को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईपीएल से जुड़े मालिकों वाली कुछ फ्रेंचाइज़ी आगामी ऑक्शन में पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर बोली नहीं लगाने का फैसला कर सकती हैं। इस मुद्दे ने क्रिकेट जगत में बहस छेड़ दी है।
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन (Michael Vaughan) ने इसे गलत बताते हुए इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड से तत्काल दखल देने की मांग की है। वॉन (Michael Vaughan) का मानना है कि क्रिकेट एक समावेशी खेल है और इसमें किसी भी देश के खिलाड़ियों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।
Michael Vaughan ने ECB से निष्पक्षता सुनिश्चित करने की उठाई मांग
माइकल वॉन (Michael Vaughan) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि ECB को इस मामले पर तेजी से कदम उठाना चाहिए। उनका तर्क है कि लीग की जिम्मेदारी ECB की है और अगर किसी भी तरह का भेदभाव सामने आता है तो उसे रोका जाना चाहिए।
वॉन (Michael Vaughan) ने इंग्लैंड में क्रिकेट को “सबको साथ लेकर चलने वाला खेल” बताते हुए कहा कि ऐसे फैसले खेल की भावना के खिलाफ हैं। ECB की ओर से बयान जारी कर कहा गया कि द हंड्रेड दुनिया भर के खिलाड़ियों का स्वागत करता है।
बोर्ड ने यह भी बताया कि इस बार ऑक्शन के लिए करीब 18 देशों के लगभग 1000 खिलाड़ियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जिनमें पाकिस्तान के 50 से अधिक खिलाड़ी शामिल हैं। हालांकि, बोर्ड ने रिपोर्ट्स की पुष्टि नहीं की है, लेकिन मामला चर्चा में बना हुआ है।
The ECB need to act fast on this .. they own the league and this should not be allowed to happen .. the most inclusive sport in the country is not one that allows this to happen .. https://t.co/IYysTSIYHt
— Michael Vaughan (@MichaelVaughan) February 20, 2026
IPL फ्रेंचाइज़ी और संभावित बहिष्कार
रिपोर्ट के अनुसार, द हंड्रेड की आठ टीमों में से चार मैनचेस्टर सुपर जायंट्स, एमआई लंदन, सदर्न ब्रेव और सनराइजर्स लीड्स ऐसी फ्रेंचाइज़ी हैं जिनका मालिकाना हक आईपीएल से जुड़े निवेशकों के पास है। दावा किया जा रहा है कि ये टीमें पाकिस्तानी खिलाड़ियों को चुनने से बच सकती हैं।
भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक तनाव का असर क्रिकेट पर भी देखा गया है। पाकिस्तानी खिलाड़ी पहले ही आईपीएल में हिस्सा नहीं ले पाते हैं। ऐसे में अगर दूसरी लीगों में भी उनके लिए दरवाजे बंद होते हैं तो यह उनके करियर पर बड़ा असर डाल सकता है।
राजनीतिक तनाव और क्रिकेट पर प्रभाव
भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तल्खी नई बात नहीं है। दोनों देश द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेलते और केवल अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में आमने-सामने आते हैं। इस पृष्ठभूमि में फ्रेंचाइज़ी स्तर पर भी दूरी बढ़ती नजर आ रही है।
इससे पहले भी साउथ अफ्रीका टी20 और यूएई की ILT20 लीग में आईपीएल से जुड़े मालिकों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर बोली नहीं लगाई थी। ऐसे में द हंड्रेड के ऑक्शन को लेकर उठ रही आशंकाएं पूरी तरह निराधार भी नहीं मानी जा रहीं।
पाकिस्तानी खिलाड़ियों की भागीदारी का इतिहास
हालांकि द हंड्रेड में पहले पाकिस्तानी खिलाड़ी खेल चुके हैं। पिछले सीजन में मोहम्मद आमिर और इमाद वसीम ने हिस्सा लिया था। इसके अलावा शाहीन शाह अफरीदी, शादाब खान और हारिस रऊफ जैसे खिलाड़ी भी इस लीग में नज़र आ चुके हैं। लेकिन महिला वर्ग में अब तक किसी पाकिस्तानी खिलाड़ी ने भागीदारी नहीं की है।
आगामी 11-12 मार्च को लंदन में होने वाला ऑक्शन इस पूरे विवाद के बीच खासा महत्वपूर्ण हो गया है। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि क्या ECB हस्तक्षेप करता है और क्या सभी फ्रेंचाइज़ी वास्तव में समान अवसर की भावना के साथ खिलाड़ियों का चयन करती हैं।
यह मामला केवल एक लीग तक सीमित नहीं है, बल्कि क्रिकेट में वैश्विक समावेशन और निष्पक्षता के बड़े सवाल से भी जुड़ा हुआ है।
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