सिर्फ गंभीर की सिफारिश पर टीम इंडिया से खेल रहा ये फ्लॉप खिलाड़ी, नहीं तो जिम्बाब्वे से भी खेलने लायक नहीं
Published - 11 Jan 2026, 02:40 PM | Updated - 12 Jan 2026, 01:01 PM
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Team India: भारतीय क्रिकेट टीम में इस समय 'युवा जोश' को शामिल करने की मुहिम तेज है। मुख्य कोच गौतम गंभीर के आने के बाद से टीम इंडिया (Team India) के चयन में कई नए चेहरे देखने को मिल रहे हैं। पिछले कुछ समय में कई खिलाड़ियों ने भारत के लिए डेब्यू किया है। इस बीच एक क्रिकेटर आपने प्रदर्शन को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है।
इस खिलाड़ी की काबिलियत पर अब सवाल उठने लगे हैं। फैंस का मानना है कि प्रदर्शन के बजाय व्यक्तिगत पसंद के आधार पर टीम का हिस्सा बनना भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए सही नहीं है।
पेसर के चयन पर सवाल, टीम इंडिया में पक्षपात?
टीम इंडिया (Team India) के तेज गेंदबाजी आक्रमण में युवा पेसर हर्षित राणा को शामिल किया जाना लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। कई क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इस खिलाड़ी का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन अभी तक उनके आईपीएल के दबदबे के करीब भी नहीं पहुँचा है। आलोचकों का तर्क है कि टीम में जगह केवल इसलिए मिल रही है क्योंकि वह आईपीएल में गौतम गंभीर की कप्तानी और मेंटरशिप के तहत कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए खेल चुके हैं।
गंभीर और केकेआर के इस खिलाड़ी के बीच का पुराना तालमेल जगजाहिर है। फैंस सोशल मीडिया पर यह आरोप लगा रहे हैं कि घरेलू क्रिकेट में हर्षित से कहीं बेहतर आंकड़े रखने वाले गेंदबाजों को दरकिनार कर केवल 'सिफारिश' के आधार पर उन्हें बार-बार मौके दिए जा रहे हैं।
फ्लॉप प्रदर्शन के बावजूद Team India में पक्की है जगह
हर्षित राणा ने जब से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा है, उनकी लाइन और लेंथ काफी साधारण नजर आई है। न्यूज़ीलैंड के खिलाफ मौजूदा सीरीज और हाल के अभ्यास सत्रों में भी वह महंगे साबित हुए हैं। उनकी गेंदबाजी में वह धार नहीं दिख रही है जो एक मुख्य तेज गेंदबाज के पास होनी चाहिए। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि क्रिकेट प्रेमी उन्हें 'जिम्बाब्वे जैसी कमजोर टीमों' के खिलाफ खेलने के लायक भी नहीं समझ रहे हैं।
टीम इंडिया (Team India) में शामिल होने के लिए जिस तरह की कड़ी प्रतिस्पर्धा होती है, वहां हर्षित का औसत प्रदर्शन अन्य उभरते हुए तेज गेंदबाजों जैसे मयंक यादव या खलील अहमद के लिए अन्याय जैसा लग रहा है। अनुभवी खिलाड़ियों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर केवल गति काम नहीं आती, बल्कि मानसिक मजबूती और निरंतरता भी जरूरी है।
क्या सिफारिश भारतीय क्रिकेट की जड़ों को कर रही है कमजोर?
गौरतलब यह है कि गौतम गंभीर ने जब से हेड कोच की गद्दी संभाली है तब से उन पर पक्षपात के आरोप लगाए जा रहे हैं। टीम इंडिया (Team India) के समर्थकों का दावा है कि हर्षित राणा जैसे खिलाड़ियों को बार-बार 'बैक' करने की कोच गंभीर की नीति से ड्रेसिंग रूम के माहौल पर भी असर पड़ सकता है।
युवाओं को मौका देना अच्छी बात है, लेकिन वह मौका उनकी हालिया फॉर्म और घरेलू क्रिकेट के प्रदर्शन के आधार पर मिलना चाहिए। अगर हर्षित राणा आगामी मैचों में खुद को साबित नहीं कर पाते हैं, तो चयनकर्ताओं और कोच गंभीर के पास उनकी पैरवी करने का कोई ठोस कारण नहीं बचेगा।
ऑथर के बारे में
सौरभ भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से रेडियो एंड टेलीविजन पत्रकारिता में उच्च शिक्षा प्राप्... रीड मोर