IPL हिस्ट्री का एकमात्र ऐसा क्रिकेटर, जिसपर ऑक्शन टेबल में मौजूद सभी टीमों ने लगाई बोली, सब चाहती थी इसे खरीदना
Published - 06 Jan 2026, 01:14 PM | Updated - 06 Jan 2026, 01:15 PM
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IPL: आईपीएल 2026 के मिनी ऑक्शन ऑस्ट्रेलियाई मूल के तेज युवा ऑलराउंडर कैमरून ग्रीन को कोलकाता नाइट राइडर्स ने 25.20 करोड़ रुपये में खरीदा था। हालांकि, कैमरून को खरीदने के लिए मुंबई इंडियंस, चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स ने भी गहरी दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन अंत में केकेआर ने बाजी मारी।
वहीं, आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी ऋषभ पंत, जिन्हें लखनऊ सुपर जायंट्स ने 27 करोड़ रुपये में खरीदा था, उनमें भी चार फ्रेंचाइजियों ने दिलचस्पी दिखाई थी। लेकिन आईपीएल (IPL) इतिहास का एक ऐसा खिलाड़ी भी है, जिसको खरीदने के लिए सभी टीमों ने बोली लगाई थी। वह सभी टीमें इस खिलाड़ी को किसी भी कीमत पर खरीदना चाहती थी।
कौन है ये खिलाड़ी?
हम जिस खिलाड़ी की बात कर रहे हैं वह कोई और नहीं बल्कि चेन्नई सुपर किंग्स के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी हैं, जो कि 44 साल की उम्र में भी आईपीएल में सक्रिय हैं। धोनी को चेन्नई सुपर किंग्स ने साल 2008 के पहले आईपीएल (IPL) ऑक्शन में 6 करोड़ रुपये में खरीदा था और वह उस वक्त ऑक्शन में बिकने वाले सबसे महंगे खिलाड़ी बने थे। धोनी काफी लंबे समय से चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेल रहे हैं और इसके बाद उनका नाम दोबारा ऑक्शन में नहीं देखने को मिला।
चेन्नई ने अपनाई थी खास रणनीति
हालांकि, पूर्व भारतीय कप्तान को खरीदने के लिए साल 2008 में चेन्नई सुपर किंग्स ने एक खास रणनीति अपनाई थी। दरअसल, चेन्नई के मालिक को मालूम था कि धोनी को खरीदने के लिए सभी फ्रेंचाइजी पैडल उठाने वाली हैं और उन्हें धोनी को लेने के लिए अन्य फ्रेंचाइजियों से जंग करनी होगी।
लेकिन खास बात ये है कि ऑक्शन टेबल पर बैठते ही चेन्नई ने आधी जंग जीत ली थी। दरअसल, उस समय सीएसके के मालिक एन. श्रीनिवासन ने फैसला किया था कि वह कोई आइकन प्लेयर नहीं चुनेंगे और इसी स्मार्ट मूव ने धोनी को चेन्नई सुपर किंग्स का थाला बना दिया।
क्या था IPL में आइकन प्लेयर का नियम?
आईपीएल (IPL) के शुरुआती दिनों में आइकन प्लेयर के नियम का उपयोग किया गया था, ताकि प्रशंसकों को इस लीग की ओर आकर्षित किया जा सके। आइकन प्लेयर के तहत लगभग सभी टीमों ने एक खास खिलाड़ी का चयन किया था, जैेसे मुंबई इंडियंस ने सचिन तेंदुलकर, केकेआर ने सौरव गांगुवी, आरसीबी ने राहुल द्रविड़, पंजाब किंग्स ने युवराज सिंह और डीसी ने वीरेंद्र सहवाह को चुना था, ताकि वह फैंस को इस लीग की ओर खींच सके।
लेकिन अगर कोई फ्रेंचाइजी ऑक्शन में आइकन प्लेयर से अधिक महंगे खिलाड़ी को खरीदता था तो उन्हें खरीदे गए खिलाड़ी से 15 प्रतिशत अधिक भुगतान आइकन प्लेयर को करना पड़ता। धोनी को अधिकतम $1.5 मिलियन डॉलर (6 करोड़ रुपये) में खरीदने के बावजूद, उन्हें आइकन खिलाड़ी की तुलना में कम कुल वेतन बिल का सामना करना पड़ा क्योंकि उन्हें 15 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान नहीं करना पड़ा।
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इन फ्रेंचाइजियों ने दिखाई थी दिलचस्पी
साल 2008 में धोनी एक बड़ा नाम बन चुके थे, क्योंकि उन्होंने अपनी कप्तानी में भारत को साल 2007 का टी20 विश्व कप जिताया था और इसी के कारण सभी फ्रेंचाइजी उन्हें अपनी टीम (IPL) में शामिल करना चाहती थी ताकि उनकी फ्रेंचाइजी की ब्रैंड वैल्यू बन सके। धोनी की शुरुआत बोली $400,000 थी, लेकिन बोली $900,000 के पार जाते ही दौड़ में सिर्फ मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स बचे थे।
जबकि अन्य फ्रेंचाइजियों ने अपने हाथ वापस खींच लिए थे। लेकिन 1.5 मिलियन डॉलर (करीब 6 करोड़) जाते ही मुंबई इंडियंस को भी मजबूरी वश अपने हाथ वापस खींचने पड़े, क्योंकि अगर वह धोनी को इससे ज्यादा में खरीदती तो उन्हें सचिन तेंदुलकर की राशि का 15 प्रतिशत अधिक देना पड़ता और इसी के कारण धोनी मुंबई नहीं बल्कि चेन्नई सुपर किंग्स के स्क्वाड में पहुंच गए और उन्होंने अपनी कप्तानी में इस फ्रेंचाइजी को पांच बार चैंपियन बनाया।
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