टी20 वर्ल्ड कप की पूरी हिस्ट्री, कौन सी टीम कितनी बार बनी चैंपियन? जानें किसका रहा इस टूर्नामेंट में दबदबा

Published - 01 Feb 2026, 02:55 PM | Updated - 01 Feb 2026, 03:22 PM

T20 World Cup

टी20 विश्व कप (T20 World Cup) 2026 का आगाज होने में मात्र कुछ ही दिन रह गए हैं। क्रिकेट का यह महाकुंभ इस साल भारत और श्रीलंका की मिट्टी पर खेला जाएगा। भारतीय टीम इस साल होने वाले टी20 विश्व कप का भरपूर फायदा उठाना चाहेगी और हर हाल में विश्व कप अपने नाम करना चाहेगी। आइए जानते हैं टी20 वर्ल्ड कप की पूरी हिस्ट्री। किसके हाथों कितना खिताब और किसका वर्चस्व।

T20 World Cup का इतिहास क्या है, कहाँ से आया आइडिया?

शुरुआती दौर में क्रिकेट में केवल टेस्ट फॉर्मेट या वनडे फॉर्मेट ही खेला जाता था, जिसका परिणाम कुछ ऐसा हुआ कि दर्शकों की संख्या धीरे-धीरे घटने लगी। कभी आपने सोचा है आखिर हमें टी20 क्रिकेट देखने में टेस्ट क्रिकेट से ज्यादा अच्छा क्यों लगता है? मनोवैज्ञानिक रूप से देखें तो इसके पीछे की वजह हमारा डोपामिन है; जो क्रिया हमें ज्यादा जल्दी उत्साह से भरती है और हमें कम समय में मज़ा देती हो, उसे देखना हमारे लिए दिलचस्प होता है।

कहानी कुछ यूँ ही शुरू हुई। वर्ष 2002 में बेंसन एंड हेजेज कप की समाप्ति के बाद, इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने घटती दर्शकों की संख्या और प्रायोजन को पुनर्जीवित करने के लिए एक नए और रोमांचक प्रारूप की तलाश की। ईसीबी के मार्केटिंग मैनेजर स्टुअर्ट रॉबर्टसन के प्रस्ताव पर 2001 में काउंटी प्रेसिडेंट्स, जिसे हम आमतौर पर काउंटी क्रिकेट के नाम से जानते हैं, ने 11-7 के बहुमत से 20 ओवर के खेल को मंजूरी दी, जिसका मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को आकर्षित करना था।

इसके परिणामस्वरूप, 13 जून 2003 को इंग्लैंड में पहली आधिकारिक 'ट्वेंटी20 ब्लास्ट' प्रतियोगिता शुरू हुई, जिसके पहले सीजन के फाइनल में सरे ने वार्विकशायर को हराकर खिताब अपने नाम किया। काउंटी क्रिकेट इंग्लैंड की टॉप लेवल घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिता है जिसमें अलग-अलग क्लब शामिल होते हैं और लगभग सभी देशों के दिग्गज क्रिकेटर इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं। साफ़ तौर पर समझें तो जिस तरह फुटबॉल क्लब के लिए रोनाल्डो और मेसी जैसे खिलाड़ी क्लब के लिए एक सीमित समय के लिए खेलते हैं, वैसा ही कुछ यहाँ भी था।

इस प्रारूप की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2004 में लॉर्ड्स के मैदान पर मिडिलसेक्स और सरे के मैच को देखने 27,509 दर्शक पहुँचे, जो दशकों में एक रिकॉर्ड था। आखिरकार 17 फरवरी 2005 को ऑकलैंड के ईडन पार्क में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच पहला पूर्ण इंटरनेशनल मेंस टी20 मैच खेला गया, जिसने विश्व क्रिकेट में एक नए युग की शुरुआत की।

T20 World Cup की शुरुआत कैसे हुई?

अच्छे दर्शकों की मौजूदगी और एंटरटेनमेंट से भरे ट्वेंटी ट्वेंटी क्रिकेट को देखने के बाद इस फॉर्मेट का विश्व कप (T20 World Cup) करवाने की बारी आई तो माजरा भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की राय पर फँसा। इंटरनेशनल लेवल पर सफलता के बाद इस फॉर्मेट को घरेलू स्तर पर भी काफी सफलता मिली, जिसके बाद आईसीसी इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर करवाने के विचार में थी पर मुख्य टीमों में से एक भारतीय टीम इस ओर अपनी राय देते हुए बोली कि हम ऐसे फॉर्मेट पर क्यों ही खेलें जो बहुत जल्दी समाप्त हो जाता है?

इसके बावजूद भारत ने पहले टी20 विश्व कप में अपनी 'बी' टीम भेजी थी क्योंकि भारत इसे सीरियस नहीं ले रहा था। आईसीसी के द्वारा इसकी शुरुआत सन 2007 में ट्रायल के रूप में की गई। आईसीसी ने अंततः निर्णय लिया कि ट्वेंटी ट्वेंटी वर्ल्ड चैम्पियनशिप का शुभारंभ करना चाहिए और 2007 में साउथ अफ्रीका में पहली बार इसे करवाया गया। पहला सीजन करवाने का मुख्य मकसद इस गेम को ग्लोबलाइज करना था जिससे ब्रॉडकास्टर को एक छोटे फॉर्मेट का प्रोडक्ट दिया जाए।

इस फॉर्मेट का यह पहला टी20 विश्व कप चैम्पियनशिप था जिसमें कुल 12 टीमों ने हिस्सा लिया था जिसे चार ग्रुप में तीन-तीन टीमें करके बाँटा गया था। बाद में क्वार्टर फाइनल में दो ग्रुप में 4-4 टीमों को रखा गया। इस वर्ल्ड कप में 10 पूर्ण सदस्यों के अलावा दो एसोसिएट टीमों को भी खेलने का मौका मिला जिसमें केन्या और स्कॉटलैंड ने हिस्सा लिया था।

इस टूर्नामेंट में भारत और पाकिस्तान फाइनल में पहुँचीं और दर्शकों को एक हाई वोल्टेज मैच देखने को मिला, इसके बाद आईसीसी को एक बहुत बड़ी सफलता मिली। पहला सीजन भारत ने कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की अगुआई में ट्रॉफी पर कब्जा जमाकर जीता और दर्शकों को क्रिकेट के सबसे छोटे प्रारूप में एंटरटेनमेंट का माध्यम मिला। इसके बाद इस टूर्नामेंट को हर दो साल में खेलने का निर्णय लिया गया।

T20 World Cup विजेता पाकिस्तान बनी

साल 2007 में इस फॉर्मेट की सफलता के बाद आईसीसी ने पूर्ण सदस्यों के अलावा दो और एसोसिएट टीमों के लिए एक टी20 टूर्नामेंट के द्वारा क्वालीफाई करने का रास्ता खोला जिससे एसोसिएट टीमों के बीच भेदभाव न हो। साल 2009 में इंग्लैंड में इस टूर्नामेंट को खेला गया और पाकिस्तान ने 21 जून 2009 को श्रीलंका को आठ विकेट से हराकर इस खिताब को जीत लिया।

इस साल हुई आईसीसी वर्ल्ड ट्वेंटी20 (T20 World Cup) में जिम्बाब्वे ने अपनी भागीदारी वापस ले ली थी जिसके बाद आयरलैंड, नीदरलैंड और स्कॉटलैंड इस टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई हुईं और भाग लिया। इस टूर्नामेंट में डिफेंडिंग चैंपियन रही भारत को सुपर 8 मुकाबले के सभी मैचों में हार का सामना करना पड़ा। इस विश्व कप में उमर गुल ने सबसे ज्यादा विकेट लिए थे वहीं युवराज सिंह ने सबसे ज्यादा छक्के लगाए थे।

अगले साल फिर 2010 में हुआ T20 World Cup

आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन साल 2008 में पाकिस्तान की सरजमीं पर होना तय था, लेकिन वहाँ सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण कई अंतरराष्ट्रीय टीमों ने दौरे से इनकार कर दिया, जिसके चलते इस बड़े टूर्नामेंट को 2009 तक के लिए टालना पड़ा। इसके बाद आईसीसी को यह आभास हुआ कि 2009 की चैंपियंस ट्रॉफी और 2011 के वनडे वर्ल्ड कप के बीच समय का अंतर बहुत कम है, जिससे दो बड़े वनडे टूर्नामेंट एक साथ कराना काफी बोझिल और अनावश्यक हो सकता था।

इसी के मद्देनजर परिषद ने वेस्टइंडीज में होने वाली 2010 की चैंपियंस ट्रॉफी को रद्द करने का साहसिक फैसला लिया और उसकी जगह टी20 वर्ल्ड कप को शामिल कर दिया। इस रणनीतिक बदलाव के कारण ही क्रिकेट इतिहास में एक अनोखा रिकॉर्ड बना, जहाँ 2009 के वर्ल्ड कप फाइनल (21 जून) और 2010 के वर्ल्ड कप के आगाज (30 अप्रैल) के बीच महज 293 दिनों का फासला रह गया।

इस साल इंग्लैंड टीम ने सभी को आश्चर्यचकित करते हुए ट्रॉफी पर कब्जा जमा लिया और 16 मई 2010 को ऑस्ट्रेलिया को फाइनल मुकाबले में सात विकेट से हरा आईसीसी ट्वेंटी20 का नया विजेता बना।

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2014 और 2016 की प्रतियोगिता

आईसीसी वर्ल्ड ट्वेंटी20 2014 में कुल 16 टीमें भाग लीं जो पहले से चार ज्यादा थीं। इस साल इस टूर्नामेंट का आयोजन बांग्लादेश में हुआ। इस साल भारत और श्रीलंका के बीच फाइनल मुकाबला खेला गया जिसमें भारत को 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा था। 6 अप्रैल 2014 को खेले गए इस मुकाबले में भारतीय टीम के बल्लेबाज कैंसर से लड़कर टीम में वापसी किए थे लेकिन उनकी बल्लेबाजी ने भारत को हार की ओर धकेल दिया था।

युवराज सिंह न बल्ले से रन बना पाए और न ही स्ट्राइक रोटेट कर सके। भारतीय टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए मात्र 130 रन बनाई जिसको श्रीलंका ने आसानी से हासिल कर लिया। वहीं बात करें 2016 की, तो इस साल इस टूर्नामेंट का आयोजन भारत में हुआ और वेस्टइंडीज ने फाइनल में इंग्लैंड को हराकर नया विश्व विजेता बनी।

साल 2018 में कई देशों की द्विपक्षीय सीरीज होने के कारण इस टूर्नामेंट को रद्द कर दिया गया और 2020 में इसे नए रूप में लाने का ऐलान किया गया। इसी बीच आईसीसी वर्ल्ड ट्वेंटी20 का नाम बदलकर 'आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप' कर दिया गया। 2020 में यह टूर्नामेंट कोविड महामारी के कारण नहीं हो सका। जबकि 2022 में इंग्लैंड ने पाकिस्तान को हराकर टी20 वर्ल्ड कप पर कब्जा जमाया था।

2024 में 20 टीमों के साथ T20 World Cup

2024 में इस आयोजन को 20 टीमों के साथ खेला गया। इस साल वेस्टइंडीज और यूएसए के द्वारा मेजबानी की गई जो इतिहास में पहली बार हुआ कि यूएसए ने आईसीसी के किसी प्रमुख इवेंट को होस्ट किया था। इस साल भारत ने टी20 विश्व कप पर कब्जा जमाया और दूसरी बार चैंपियन बन इतिहास रच दिया।

भारत ने साउथ अफ्रीका को रोमांचक फाइनल मुकाबले में सात रन से हरा दिया, जिसके बाद 17 साल बाद इस कप को भारत वापस लाया गया। इस साल (2026) भारतीय टीम टी20 विश्व कप की सबसे बड़ी दावेदार है और इसे हर हाल में अपने घर लाना चाहेगी।

चूंकि यह कप भारत और श्रीलंका की जमीन पर खेला जा रहा है, तो दिग्गजों का मानना है कि भारतीय टीम इस समय सबसे अच्छे फॉर्म में भी है और अपने घर पर होने का फायदा भी उठाएगी। देखा जाए तो भारत, वेस्टइंडीज और इंग्लैंड इस फॉर्मेट के बेताज बादशाह हैं क्योंकि तीनों देशों ने दो-दो ट्रॉफी उठाई हैं। जबकि ऑस्ट्रेलिया को आप इस कड़ी में पीछे नहीं छोड़ सकते।

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Sourabh Kumar

सौरभ भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से रेडियो एंड टेलीविजन पत्रकारिता में उच्च शिक्षा प्राप्... रीड मोर

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