सिर्फ 8वीं पास, कभी लगाया झाड़ू-पोछा, पिता सिलेंडर मजदूर, रुला देने वाली KKR के नए उपकप्तान Rinku Singh की कहानी
Published - 25 Mar 2026, 01:21 PM | Updated - 25 Mar 2026, 01:36 PM
भारतीय क्रिकेट के एक ऐसा सितारा जिनकी संघर्ष की कहानी सिर्फ नाम के लिए ही नहीं बल्कि असल जीवन से मेल खाती है। अलीगढ़ की तंग गलियों से निकलकर आईपीएल के सबसे बड़े सितारों में शुमार होने तक का उनका सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।
रिंकू सिंह (Rinku Singh) ने अपनी परिस्थित को जिस तरह से संभाल कर इतने बड़े सितारे बने उस स्थिति में भारत के कई क्रिकेट खिलाड़ी अपने संघर्ष को बीच में छोड़कर दूसरा रास्ता अपना लेते हैं। हाल ही में उन्हें कोलकाता नाइट राइडर्स का उपकप्तान नियुक्त किया गया।
Rinku Singh के बचपन का संघर्ष कैसा रहा था ?

रिंकू सिंह (Rinku Singh) का जन्म उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक बहुत ही गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता खानचंद्र सिंह घर-घर जाकर एलपीजी सिलेंडर पहुंचाने का काम करते थे, जिससे घर का गुजारा मुश्किल से हो पाता था। रिंकू के पांच भाई-बहन थे और परिवार एक छोटे से कमरे के घर में रहता था। आर्थिक तंगी का आलम यह था कि उनके भाई ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार की मदद करते थे।
रिंकू को बचपन से ही क्रिकेट का शौक था, लेकिन बल्ले और गेंद के लिए पैसे जुटाना उनके लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। उनके पास ट्रेनिंग के लिए जूते तक नहीं थे, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी।
रिंकू सिंह (Rinku Singh) पढ़ाई में बहुत अच्छे नहीं थे और उन्होंने केवल 8वीं तक शिक्षा प्राप्त की थी। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उन्होंने नौकरी की तलाश शुरू की। एक समय ऐसा आया जब उन्हें एक कोचिंग सेंटर में झाड़ू-पोछा लगाने का काम मिला। रिंकू वहां काम करने भी गए, लेकिन उनका मन नहीं लगा। उन्होंने फैसला किया कि वे मजदूरी करने के बजाय क्रिकेट पर ध्यान देंगे और इसी खेल से अपनी किस्मत बदलेंगे।
IPL में आकर घाटे में गया ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी, PSL में मिल रही थी ज्यादा सैलरी
Rinku Singh के क्रिकेट की शुरूआत कैसे हुई ?
रिंकू सिंह (Rinku Singh) के क्रिकेट की शुरुआत संघर्ष और जुनून की एक ऐसी मिसाल है, जिसे सुनकर किसी की भी आँखें नम हो जाएं। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक बेहद गरीब परिवार में जन्मे रिंकू के लिए क्रिकेटर बनने का सपना देखना भी एक बड़ी चुनौती थी।
उनके पिता घर-घर जाकर गैस सिलेंडर पहुँचाने का काम करते थे और परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि रिंकू को घर चलाने में मदद करने के लिए झाड़ू-पोछा लगाने तक की नौकरी का सुझाव दिया गया था।
लेकिन रिंकू का मन सिर्फ क्रिकेट में रमता था। उन्होंने उस सफाई कर्मचारी की नौकरी को ठुकरा दिया और अपने भाई से कहा कि वे क्रिकेट के जरिए ही परिवार की गरीबी दूर करेंगे। शुरुआत में उनके पास अच्छे जूते या किट खरीदने के पैसे नहीं थे, लेकिन अलीगढ़ के स्थानीय कोचों और क्लबों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें सहारा दिया।
रिंकू सिंह (Rinku Singh) की मेहनत तब रंग लाई जब उन्होंने दिल्ली में एक टूर्नामेंट जीता और इनाम में मिली बाइक अपने पिता को सौंप दी। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश की अंडर-16 टीम में जगह बनाई और शानदार प्रदर्शन के दम पर धीरे-धीरे घरेलू क्रिकेट की सीढ़ियाँ चढ़ते गए। 2014 में लिस्ट-ए क्रिकेट में डेब्यू करने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा।
कौन हैं Aryaman Birla? जो बने RCB के नए चेयरमैन, कभी राजस्थान रॉयल्स ने ऑक्शन में था खरीदा
आईपीएल से भारतीय टीम तक पहुंचने की कहानी
रिंकू सिंह (Rinku Singh) का आईपीएल से लेकर भारतीय टीम तक का सफर उनकी अटूट मेहनत और कभी हार न मानने वाले जज्बे की कहानी है। रिंकू सिंह की प्रतिभा को सबसे पहले किंग्स इलेवन पंजाब ने पहचाना और 2017 में उन्हें 10 लाख रुपये के बेस प्राइस पर खरीदा।
हालांकि, उन्हें वहां ज्यादा मौके नहीं मिले। असली मोड़ 2018 के ऑक्शन में आया, जब कोलकाता नाइट राइडर्स ने उन पर भरोसा जताया और 80 लाख रुपये की बोली लगाकर अपनी टीम में शामिल किया। शुरुआत में रिंकू को बेंच पर बैठना पड़ा, लेकिन केकेआर मैनेजमेंट ने उनकी फील्डिंग और कड़ी मेहनत को देखते हुए उन्हें बैक करना जारी रखा। 2023 में गुजरात टाइटंस के खिलाफ आखिरी 5 गेंदों पर 5 छक्के जड़कर उन्होंने रातों-रात खुद को आईपीएल के सबसे बड़े फिनिशर के रूप में स्थापित कर दिया।
आईपीएल 2023 के शानदार प्रदर्शन के बदौलत जिसमें उन्होंने 474 रन बनाए थे उसके बाद चयनकर्ताओं के लिए उन्हें नजरअंदाज करना नामुमकिन था। अगस्त 2023 में आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के जरिए उनका अंतरराष्ट्रीय डेब्यू हुआ। रिंकू ने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल की अपनी फॉर्म को नीली जर्सी में भी बरकरार रखा।
दबाव की स्थितियों में शांत रहकर मैच खत्म करने की उनकी कला ने उन्हें भारतीय टी20 टीम का अभिन्न हिस्सा बना दिया। आज वे टीम इंडिया के लिए एक भरोसेमंद लोअर मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज बन चुके हैं। इस साल टी20 विश्व कप 2026 के स्क्वॉड में शामिल किया गया और विजेता टीम का हिस्सा बनकर हमेशा के लिए इतिहास में नाम लिखवा दिया।
Rinku Singh संभालेंगे केकेआर की उपकप्तानी
भारतीय टीम के धाकड़ बल्लेबाज रिंकू सिंह (Rinku Singh) ने धीरे-धीरे हर सीढ़ी को पार करते हुए उस मुकाम पर पहुंच गए जिसका मौका कई बड़े स्टार को भी नहीं मिला। रिंकू अब केकेआर की कप्तानी संभालेंगे। आईपीएल 2026 के लिए केकेआर ने उन्हें 13 करोड़ में रिटेन किया और उपकप्तानी का जिम्मा सौंपा।
इसके बाद उनके निजी जीवन की बात करें तो उनकी सगाई उत्तर प्रदेश के मछलीशहर की सांसद प्रिया सरोज से हाल ही में संपन्न हुई है। प्रिया सरोज पेशावर जिंदगी में वकालत की पढ़ाई की हुई है।
टी20 विश्व कप 2026 के दौरान रिंकू सिंह के पिता खानचंद्र सिंह की मृत्यु हो गई थी जिसकी वजह से उन्हें बीच में टीम का साथ छोड़कर जाना पड़ा था लेकिन वे कुछ दिनों बाद वापस टीम के साथ मैदान में लौट गए थे।
ऑथर के बारे में
सौरभ भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से रेडियो एंड टेलीविजन पत्रकारिता में उच्च शिक्षा प्राप्... रीड मोर