“सिर्फ 3-6 महीने बचे…” Yuvraj Singh को डॉक्टर ने दी थी ये डराने वाली खबर, फिर युवी ने दिया था ये तगड़ा जवाब

Published - 10 Apr 2026, 09:30 AM | Updated - 10 Apr 2026, 09:44 AM

Yuvraj Singh

भारतीय क्रिकेट इतिहास में युवराज सिंह (Yuvraj Singh) का नाम सिर्फ़ एक मैच-विनर के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे योद्धा के रूप में लिया जाता है जिसने मैदान के बाहर भी सबसे बड़ी लड़ाई जीती।

2007 टी20 वर्ल्ड कप और 2011 वनडे वर्ल्ड कप में अपने शानदार प्रदर्शन से टीम इंडिया को जीत दिलाने वाले युवराज ने उस समय खेला, जब वह अंदर ही अंदर एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। यह कहानी सिर्फ़ क्रिकेट की नहीं, बल्कि हौसले, संघर्ष और वापसी की मिसाल है।

करियर के शिखर पर मिला Yuvraj Singh को सबसे बड़ा झटका

I was not feeling respected' - Yuvraj Singh recalls decision to retire from cricket

2011 वर्ल्ड कप युवराज सिंह (Yuvraj Singh) के करियर का सुनहरा दौर था। उन्होंने बल्ले और गेंद दोनों से कमाल का प्रदर्शन किया और ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ बने। लेकिन इस सफलता के पीछे एक ऐसा दर्द छिपा था, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते थे।

टूर्नामेंट के दौरान ही उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। उन्हें सांस लेने में तकलीफ, थकान और उल्टी जैसी समस्याएं हो रही थीं, लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज किया और देश के लिए खेलते रहे।

“सिर्फ 3-6 महीने बचे हैं” – डॉक्टर की चेतावनी

वर्ल्ड कप खत्म होने के बाद जब युवराज (Yuvraj Singh) ने जांच करवाई, तो सच्चाई सामने आई। डॉक्टर नितेश रोहतगी ने उन्हें बताया कि उनके दिल और फेफड़ों के बीच ट्यूमर है। स्थिति इतनी गंभीर थी कि अगर तुरंत इलाज नहीं कराया गया, तो उनके पास जीने के लिए केवल 3 से 6 महीने ही बचे हैं। यह खबर किसी भी इंसान को तोड़ सकती थी, खासकर उस खिलाड़ी को जो अपने करियर के सबसे ऊंचे मुकाम पर था। लेकिन युवराज ने हार मानने के बजाय इस चुनौती को स्वीकार किया।

अमेरिका में इलाज और मानसिक संघर्ष

इलाज के लिए युवराज (Yuvraj Singh) अमेरिका गए, जहां उन्होंने मशहूर डॉक्टर लॉरेंस आइनहॉर्न से इलाज कराया, जिन्होंने पहले भी कई बड़े मामलों को संभाला था। इस दौरान युवराज को यह भी कहा गया कि शायद वह दोबारा क्रिकेट नहीं खेल पाएंगे। यह उनके लिए शारीरिक से ज्यादा मानसिक लड़ाई थी।

एक खिलाड़ी जिसकी पहचान ही क्रिकेट से हो, उसके लिए यह स्वीकार करना बेहद मुश्किल था कि वह शायद मैदान पर लौट ही न पाए। फिर भी उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया और अंदर से लड़ने का जज़्बा बनाए रखा।

दिग्गजों का साथ और ऐतिहासिक वापसी

इस कठिन समय में उन्हें कई दिग्गज खिलाड़ियों का साथ मिला। अनिल कुंबले और सचिन तेंदुलकर जैसे महान खिलाड़ी उनसे मिलने पहुंचे और उनका हौसला बढ़ाया। इलाज के दौरान भी युवराज क्रिकेट से जुड़े रहे, हालांकि उन्हें आराम करने की सलाह दी गई थी।

कीमोथेरेपी और लंबी रिकवरी के बाद उन्होंने हार नहीं मानी और सिर्फ छह महीने के भीतर ही भारतीय टीम में वापसी कर ली। वापसी के बाद भले ही वह अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में नहीं थे, लेकिन उनका मैदान पर उतरना ही एक बड़ी जीत थी।

युवराज सिंह (Yuvraj Singh) की यह कहानी बताती है कि असली चैंपियन वही होता है जो मुश्किल हालात में भी हार नहीं मानता। उन्होंने सिर्फ कैंसर को हराया ही नहीं, बल्कि यह भी साबित किया कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

ये भी पढ़े : एशियन गेम्स के शेड्यूल का हुआ ऐलान, टीम इंडिया भी लेगी इसमें हिस्सा, वैभव-रिजवी समेत हिस्सा बनेंगे ये 15

Tagged:

india cricket team yuvraj singh T20 World cup 2007 ICC 2011 World Cup
Vasu Jain

मुझे क्रिकेट से गहरा लगाव है और मैं वर्ष 2007 से इस खेल को लगातार देखता और समझता आ रहा हूँ। क्रिकेट... रीड मोर

For fastest livescore in India
hindi.cricketaddictor.com