KL Rahul: ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान कठिन हालात में इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखने वाले केएल राहुल (KL Rahul) का करियर हमेशा चर्चा में रहा है। बेहतरीन तकनीक, सहज टाइमिंग और स्वाभाविक बैटिंग टैलेंट के बावजूद, उनके आंकड़े कई बार उनकी काबिलियत को पूरी तरह नहीं दर्शा पाए।
चोटें, रोल में बदलाव और फॉर्मेट के हिसाब से खुद को ढालने की मजबूरी ने उनके सफर को चुनौतीपूर्ण बनाया। अब, जब राहुल अपने करियर के परिपक्व दौर में हैं, रिटायरमेंट को लेकर उनका बेबाक नजरिया सुर्खियों में है।
वनडे मिडिल-ऑर्डर में मिला KL Rahul को नया जीवन
2023 वर्ल्ड कप के बाद केएल राहुल (KL Rahul) के वनडे करियर ने नई दिशा पकड़ी है। मिडिल-ऑर्डर में नंबर 5 की जिम्मेदारी ने उन्हें वह स्थिरता दी, जिसकी लंबे समय से तलाश थी। इस भूमिका में राहुल ने न केवल दबाव में रन बनाए, बल्कि टीम को मैच फिनिश करने की क्षमता भी दी।
इस अवधि में उनका औसत 60 से अधिक और स्ट्राइक रेट लगभग 100 के आसपास रहा है, जो उन्हें इस पोज़िशन पर दुनिया के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज़ों में शामिल करता है। 33 साल की उम्र में राहुल का यह प्रदर्शन बताता है कि वनडे क्रिकेट में वह अभी और बेहतर हो रहे हैं।
टेस्ट और T20I में अधूरी संतुष्टि
जहां वनडे में राहुल (KL Rahul) का ग्राफ ऊपर जाता दिखता है, वहीं टेस्ट और T20I में तस्वीर उतनी संतोषजनक नहीं रही। टेस्ट क्रिकेट में वह भारत के पहले पसंद के ओपनर बने रहे, लेकिन 35.86 का औसत उनकी क्लास के अनुरूप नहीं माना जाता।
विदेशी दौरों पर शानदार पारियों के बावजूद, निरंतरता की कमी उनके टेस्ट करियर पर सवाल खड़े करती है। दूसरी ओर, 2022 के बाद T20I टीम से बाहर होना यह संकेत देता है कि इस फॉर्मेट में उनका इंटरनेशनल अध्याय लगभग बंद हो चुका है।
रिटायरमेंट को लेकर साफ और बेबाक सोच
हाल ही में इंग्लैंड के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज़ केविन पीटरसन के साथ एक बातचीत के दौरान केएल राहुल (KL Rahul) ने रिटायरमेंट पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने साफ कहा कि जब समय आएगा, तो वह फैसले को खींचेंगे नहीं। उनके मुताबिक, अगर कोई खिलाड़ी खुद के साथ ईमानदार है, तो उसे समझ आ जाता है कि कब आगे बढ़ना है।
राहुल मानते हैं कि क्रिकेट किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं है और खेल उनके बिना भी चलता रहेगा। इसी सोच के कारण उनके लिए भविष्य में रिटायरमेंट का फैसला लेना कठिन नहीं होगा।
चोटें, मानसिक संघर्ष और बदला हुआ नजरिया
राहुल (KL Rahul) ने अपने करियर में कई गंभीर चोटों का सामना किया है और उनके अनुसार सबसे मुश्किल लड़ाई शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक होती है। बार-बार रिकवरी के दौरान दिमाग हार मानने लगता है और खिलाड़ी खुद से सवाल करने लगता है कि क्या अब रुक जाना चाहिए।
राहुल का कहना है कि पिता बनने के बाद उनका जीवन को देखने का नजरिया पूरी तरह बदल गया है। अब वह खुद को नेशनल टीम के लिए अपरिहार्य नहीं मानते और परिवार व व्यक्तिगत संतुलन को भी उतनी ही अहमियत देते हैं।
फिलहाल वह भारत की वनडे और टेस्ट योजनाओं का हिस्सा हैं और घरेलू क्रिकेट में कर्नाटक के लिए खेलते दिखेंगे, लेकिन उनके बयान यह साफ करते हैं कि जब सही समय आएगा, तो वह बिना किसी हिचक के क्रिकेट से आगे बढ़ने का फैसला करेंगे।