कपिल देव या हार्दिक पांड्या: कौन भारत का सर्वश्रेष्ठ ODI ऑलराउंडर, इन आंकड़ों से सबकुछ हुआ साफ़
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भारतीय क्रिकेट के इतिहास में ऑलराउंडर की भूमिका हमेशा से बेहद खास रही है। ऐसे खिलाड़ी जो बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में टीम को संतुलन देते हैं, वही बड़े टूर्नामेंट में फर्क पैदा करते हैं। जब भी भारत के सर्वश्रेष्ठ ODI ऑलराउंडर की बात होती है, तो कपिल देव और हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) दो बड़े नाम सबसे पहले सामने आते हैं।
दोनों अलग-अलग दौर के खिलाड़ी हैं, लेकिन आंकड़ों और प्रभाव के आधार पर उनकी तुलना आज भी चर्चा का विषय बनी रहती है। ODI क्रिकेट के संदर्भ में यह तुलना सिर्फ भावनाओं पर नहीं, बल्कि ठोस आंकड़ों और भूमिका की समझ पर आधारित होनी चाहिए।
ODI करियर की लंबाई और कुल योगदान
कपिल देव का ODI करियर भारतीय क्रिकेट की नींव मजबूत करने वाला रहा। उन्होंने 225 वनडे मैच खेले, जिसमें 3,783 रन बनाए और 253 विकेट हासिल किए। यह आंकड़े अपने आप में बताते हैं कि वह लंबे समय तक टीम इंडिया की रीढ़ रहे। दूसरी ओर हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) का ODI करियर अभी उतना लंबा नहीं है।
उन्होंने अब तक 94 वनडे मुकाबले खेले हैं, जिसमें उन्होंने 1,904 रन और 91 विकेट अपने नाम किये हैं। यहां साफ फर्क करियर की अवधि और मैचों की संख्या का है। कपिल देव ने लगभग डेढ़ दशक तक लगातार प्रदर्शन किया, जबकि हार्दिक का करियर अब भी विकास के चरण में है।
बल्लेबाजी में प्रभाव और औसत की तुलना
अगर सिर्फ बल्लेबाजी की बात करें तो हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) के आंकड़े अधिक प्रभावशाली नजर आते हैं। उनका ODI बल्लेबाजी औसत 32 से ऊपर है, जो आधुनिक वनडे क्रिकेट के लिहाज से काफी मजबूत माना जाता है। वह अक्सर निचले क्रम में आकर तेज रन बनाते हैं और मैच का रुख पलटने की क्षमता रखते हैं।
इसके विपरीत कपिल देव का बल्लेबाजी औसत लगभग 24 रहा, लेकिन यह आंकड़ा उनके दौर के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उस समय वनडे क्रिकेट में आक्रामक बल्लेबाजी उतनी आम नहीं थी और रन गति अपेक्षाकृत धीमी रहती थी। कपिल देव ने कई मौकों पर दबाव में टीम को संभालने वाली पारियां खेलीं, जिनका महत्व सिर्फ औसत से नहीं आंका जा सकता।
गेंदबाजी में असर और जिम्मेदारी
गेंदबाजी के मोर्चे पर कपिल देव की बढ़त साफ नजर आती है। उनका ODI गेंदबाजी औसत लगभग 27 रहा, जो किसी भी तेज गेंदबाज ऑलराउंडर के लिए बेहतरीन माना जाता है। नई गेंद से विकेट निकालना और मिडिल ओवर्स में ब्रेकथ्रू देना उनकी पहचान थी।
हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) का गेंदबाजी औसत 35 के आसपास है, जो दिखाता है कि वह गेंदबाजी में उतने नियमित स्ट्राइक बॉलर नहीं रहे। हालांकि हार्दिक का इस्तेमाल अक्सर सीमित ओवरों में किया गया है और उनसे ज्यादा अपेक्षा कंट्रोल से ज्यादा ब्रेकथ्रू की नहीं रही। इसके बावजूद कपिल देव की निरंतरता और विकेट लेने की क्षमता उन्हें गेंदबाजी में आगे रखती है।
कपिल देव या Hardik Pandya: दौर , भूमिका और मैच इम्पैक्ट का फर्क
इन दोनों खिलाड़ियों की तुलना करते समय उनके खेलने के दौर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कपिल देव ऐसे युग में खेले जब फिटनेस, उपकरण और बल्लेबाजी तकनीक आज जैसी उन्नत नहीं थी।
इसके बावजूद उन्होंने भारत को 1983 का विश्व कप दिलाया और उस जीत की नींव ऑलराउंड प्रदर्शन से रखी। हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) आधुनिक क्रिकेट का चेहरा हैं, जहां पावर-हिटिंग, स्ट्राइक रेट और बहुआयामी स्किल्स को ज्यादा महत्व दिया जाता है।
वह एक ऐसे ऑलराउंडर हैं जो सीमित गेंदबाजी के साथ विस्फोटक बल्लेबाजी से मैच का रुख बदलते हैं। यही वजह है कि आंकड़ों में हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) कुछ जगह आगे दिखते हैं, जबकि कुल प्रभाव और विरासत में कपिल देव का नाम भारी पड़ता है।
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