IPL 2022 Auction: जानिए क्या है 'साइलेंट टाई ब्रेक नियम', जिससे खिलाड़ी और BCCI दोनों की होती है कमाई
Published - 11 Feb 2022, 09:38 AM

12 और 13 फरवरी से IPL 2022 Auction शुरू होने वाला है। IPL 2022 Auction मेगा ऑक्शन होगा। इस बार IPL में दो नहीं टीमों का आगमन हुआ है। यह दो टीम लखनऊ और अहमदाबाद की है। IPL 2022 Auction में इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर की कोहनी पर चोट होने के वह IPL 2022 में खेल तो नहीं पाएंगे फिर उन्होंने IPL 2022 Auction में अपना नाम दिया है। टीमें आर्चर पर IPL के साइलेंट टाई ब्रेक नियम के तहत बोली लग सकती है। लेकिन सवाल यह उठता है कि ये साइलेंट टाई ब्रेक नियम है क्या? तो चलिए हम आपको बताते है।
IPL 2022 Auction: क्या है IPL का साइलेंट टाई ब्रेक नियम?
IPL 2022 Auction को लेकर सभी काफी उत्सुक है। करीब 10 साल बाद फिर से 10 टीमों के बीच खिलाड़ियों को अपने साथ जोड़ने की होड़ रहेगी। आपको बता दें कि, 1200 से भी ज्यादा खिलाड़ियों ने IPL 2022 Auction के लिए नाम भेजा था लेकिन इनमें से कटाई-छंटाई के बाद केवल 590 नाम ही बचे हैं। वहीं 10 टीमों ने मिलाकर कुल 33 प्लेयर्स को पहले ही रिटेन कर लिया है। ऐसे में ऑक्शन में न्यूनतम 147 और अधिकतम 217 खिलाड़ियों पर ही दांव लग सकता है।
भारत से लेकर ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, बांग्लादेश, दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज, न्यूजीलैंड के कई बड़े-बड़े नाम ऑक्शन का हिस्सा है। इनके अलावा नेपाल, स्कॉटलैंड, नामीबिया और अमेरिका जैसे एसोसिएट देशों से भी खिलाड़ी IPL 2022 Auction का हिस्सा बने हैं। IPL 2022 Auction का एक नियम साइलेंट टाई ब्रेक भी होता है। साल 2010 में साइलेंट टाई ब्रेक नियम आया था जिसे छोटी ऑक्शन के लिए लागू किया गया था।
यह नियम तब काम आता है जब कोई फ्रेंचाइजी किसी खिलाड़ी के लिए आखिरी बोली लगाई लेकिन इस दौरान उसका पर्स खत्म हो जाए। इस दौरान उसकी बोली किसी दूसरी फ्रेंचाइजी की बोली से मैच कर जाती है। तब दोनों फ्रेंचाइजी से लिखित बोली देने को कहा जाता है। इसमें उन्हें आखिरी बोली से ऊपर दिए जाने वाली रकम के बारे में लिखना होता है। इसमें जिसकी रकम ज्यादा होती है उसे खिलाड़ी मिल जाता है।
कैसे कमाता है BCCI साइलेंट टाई ब्रेक नियम से ?
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टाई ब्रेक की नीलामी का पैसा फ्रेंचाइजी को BCCI को देना पड़ता है। टीम को उतना ही पैसा मिलता है जितना उसके पर्स में होता है बाकी का पैसा BCCI का होता है। साइलेंट टाई ब्रेक बोली में रकम पर कोई पाबंदी नहीं होती है। अगर टाई ब्रेक बोली में भी दोनों टीमों की रकम बराबर रहती है तब फिर से प्रक्रिया दोहराई जाती है। यह तब तक होता है जब तक कि किसी एक फ्रेंचाइजी की रकम दूसरे से ज्यादा न आ जाए।
ऑथर के बारे में

मानवी नौटियाल एक उत्साही और अनुभवी स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें खेलों की दुनिया से गहरा लगाव है।... रीड मोर