लगातार 3 मुकाबलों पर कैसे शून्य पर OUT हो गए अभिषेक शर्मा? अब जाकर कारण आया सामने

Published - 19 Feb 2026, 01:45 PM | Updated - 19 Feb 2026, 01:49 PM

Abhishek Sharma

Abhishek Sharma : आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय टीम ने ग्रुप-स्टेज के अपने सभी मुकाबले जीतकर सुपर एट्स में दमदार एंट्री की है, लेकिन इन जीतों के बीच एक चौंकाने वाला आंकड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है।

दुनिया के नंबर एक रैंक वाले टी20I बल्लेबाज़ अभिषेक शर्मा (Abhishek Sharma) लगातार तीन मैचों में शून्य पर आउट हो गए हैं। पिछले डेढ़ साल में भारत की व्हाइट-बॉल सफलता के अहम स्तंभ रहे इस आक्रामक ओपनर का यह प्रदर्शन फैंस और क्रिकेट विशेषज्ञों दोनों के लिए हैरान करने वाला है।

अलग-अलग तरीके से आउट हुए Abhishek Sharma, कोई एक पैटर्न नहीं

अगर अभिषेक (Abhishek Sharma) के तीनों आउट पर नजर डालें तो साफ है कि उनकी विफलता के पीछे कोई एक तकनीकी खामी नहीं दिखती। वानखेड़े में USA के खिलाफ उन्होंने डीप कवर पर लॉफ्टेड शॉट खेलते हुए कैच थमा दिया। कोलंबो में पाकिस्तान के खिलाफ हाई-प्रोफाइल मुकाबले में सलमान अली आगा की गेंद पर पुल शॉट मिसटाइम हो गया।

अहमदाबाद में नीदरलैंड्स के खिलाफ वह ऑफ-स्पिन के खिलाफ अक्रॉस द लाइन खेलने की कोशिश में बोल्ड हो गए। तीनों बार आउट होने का तरीका अलग था। एक मिस-हिट, एक मिसटाइमिंग और एक मिस्ड कनेक्शन। इससे संकेत मिलता है कि यह किसी एक खास कमजोरी का मामला नहीं, बल्कि परिस्थितियों और फैसलों का मिश्रण है।

विरोधियों की रणनीति और ऑफ-स्पिन का जाल

पाकिस्तान और नीदरलैंड्स दोनों ने अभिषेक (Abhishek Sharma) के खिलाफ शुरुआत में ही ऑफ-स्पिन का सहारा लिया। एक बाएं हाथ के आक्रामक ओपनर के खिलाफ यह सोची-समझी रणनीति थी। पावरप्ले में फील्डिंग सर्कल के अंदर रहती है और अभिषेक (Abhishek Sharma) की पहचान तेज शुरुआत से है, ऐसे में विरोधी टीमों ने उन्हें अटैक करने के लिए उकसाया।

अभिषेक (Abhishek Sharma) ने भी अपने स्वाभाविक खेल को नहीं छोड़ा और मोमेंटम बनाने के बजाय उसे मजबूर करने की कोशिश की। यही जोखिम भरा अप्रोच उनकी ताकत भी है और फिलहाल वही उनके खिलाफ जा रहा है।

टीम का संतुलन बना सहारा

अभिषेक (Abhishek Sharma) के शून्य पर आउट होने के बावजूद भारतीय टीम को नुकसान नहीं हुआ है। ईशान किशन ने लगातार अच्छी शुरुआत दी है, जबकि सूर्यकुमार यादव, हार्दिक पांड्या और शिवम दुबे ने मिडिल ऑर्डर में जिम्मेदारी निभाई है। शुरुआती विकेट गिरने के बाद भी भारत ने बड़े स्कोर खड़े किए या लक्ष्य का पीछा सफलतापूर्वक किया।

असिस्टेंट कोच रयान टेन डोएशेट ने भी नेट्स में अभिषेक की सकारात्मक तैयारी का जिक्र करते हुए टीम के भरोसे को दोहराया है। इससे साफ है कि टीम मैनेजमेंट इसे लंबा संकट नहीं मान रहा है।

आगे की राह और बढ़ता दबाव

हालांकि ग्रुप-स्टेज में भारत की जीतों ने इस समस्या को ढक दिया है, लेकिन सुपर एट्स में चुनौती और कड़ी होगी। मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के सामने शुरुआती स्थिरता की अहमियत बढ़ जाती है। तीन लगातार डक सांख्यिकीय रूप से चिंता जरूर पैदा करते हैं, लेकिन टी20 क्रिकेट में ऐसे दौर असामान्य नहीं हैं।

टीम फिलहाल बदलाव के मूड में नहीं दिख रही और वही आक्रामक तरीका जारी रखने की संभावना है जिसने अभिषेक को शीर्ष रैंकिंग तक पहुंचाया। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि क्या यह सिर्फ एक छोटा सा स्लंप है या टूर्नामेंट के अगले चरण में कोई बड़ा मोड़ लेकर आएगा।

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Vasu Jain

मुझे क्रिकेट से गहरा लगाव है और मैं वर्ष 2007 से इस खेल को लगातार देखता और समझता आ रहा हूँ। क्रिकेट... रीड मोर

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