'द हंड्रेड' के लिए पाकिस्तानी खिलाड़ियों के समर्थन में उतरें हैरी ब्रूक, बोले 'ये IPL ओनर्स की बहुत शर्मनाक बात....'
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Harry Brook: इंग्लैंड के लिमिटेड ओवर्स कप्तान हैरी ब्रूक (Harry Brook) ने द हंड्रेड लीग को लेकर चल रहे विवाद पर खुलकर अपनी राय रखी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत की मालिकी वाली कुछ फ्रेंचाइजी आगामी ऑक्शन में पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर बोली नहीं लगाने का मन बना चुकी हैं।
इस खबर के सामने आने के बाद क्रिकेट जगत में बहस तेज हो गई है। ब्रूक (Harry Brook) ने साफ शब्दों में कहा कि अगर किसी खिलाड़ी को उसकी राष्ट्रीयता के आधार पर बाहर रखा जाता है तो यह खेल की भावना के खिलाफ है और बेहद शर्मनाक बात होगी।
'द हंड्रेड' के लिए पाकिस्तानी खिलाड़ियों के समर्थन में उतरें Harry Brook
सूत्रों के मुताबिक, चार ऐसी फ्रेंचाइजी जो इंडियन प्रीमियर लीग से जुड़ी कंपनियों के स्वामित्व में हैं, 11 और 12 मार्च को होने वाले ऑक्शन में पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर विचार नहीं कर रही हैं। इस फैसले को लेकर कई दिग्गजों ने चिंता जताई है।
पाकिस्तान के 63 पुरुष और चार महिला खिलाड़ियों ने इस बार द हंड्रेड ऑक्शन के लिए अपना नाम दर्ज कराया है। ऐसे में अगर उन्हें केवल राष्ट्रीयता के आधार पर नज़रअंदाज़ किया जाता है तो यह खिलाड़ियों के साथ भेदभाव माना जाएगा।
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। उनका मानना है कि किसी भी खिलाड़ी को उसके देश की वजह से बाहर करना खेल की बुनियादी भावना के खिलाफ है और इसे रोका जाना चाहिए।
Harry Brook का स्पष्ट रुख
26 वर्षीय हैरी ब्रूक (Harry Brook), जिन्हें हाल ही में भारत की मालिकी वाली सनराइजर्स लीड्स ने £465,000 की बड़ी रकम में साइन किया है, इस सीजन के सबसे महंगे खिलाड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने पिछले दो सीजन में टीम की कप्तानी की थी, लेकिन इस बार उन्होंने कप्तानी से हटने का फैसला किया है।
श्रीलंका के खिलाफ इंग्लैंड के सुपर 8 मुकाबले से पहले उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका (Harry Brook) पूरा ध्यान टी20 वर्ल्ड कप पर है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान एक बेहतरीन क्रिकेट राष्ट्र है और उसके खिलाड़ियों को द हंड्रेड में न देखना निराशाजनक होगा।
ब्रूक (Harry Brook) ने कहा कि पाकिस्तान के पास दुनिया के कुछ सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं और उन्हें किसी भी अंतरराष्ट्रीय लीग में खेलने का अवसर मिलना चाहिए। उनका बयान इस विवाद के बीच एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
IPL से जुड़ी फ्रेंचाइजियों की भूमिका
द हंड्रेड की आठ में से चार फ्रेंचाइजी अब उन कंपनियों के स्वामित्व में हैं जो आईपीएल टीमों को भी नियंत्रित करती हैं। पाकिस्तान और भारत के बीच 2009 से चले आ रहे कूटनीतिक तनाव के कारण पाकिस्तानी खिलाड़ी आईपीएल में हिस्सा नहीं ले पाए हैं।
माना जा रहा है कि उसी पृष्ठभूमि का असर अब अन्य लीगों में भी दिखाई दे रहा है। दक्षिण अफ्रीका की SA20 लीग और यूएई की ILT20 में भी आईपीएल से जुड़ी टीमों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों को साइन नहीं किया है, जबकि अन्य देशों के खिलाड़ियों को मौका दिया गया है।
इसके उलट, कुछ गैर-आईपीएल मालिकाना हक वाली टीमों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों को साइन कर संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। यह अंतर साफ दिखाता है कि विवाद केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक और व्यावसायिक कारक भी जुड़े हुए हैं।
ECB की प्रतिक्रिया और आगे की राह
इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि द हंड्रेड दुनिया भर के खिलाड़ियों का स्वागत करता है और उन्हें उम्मीद है कि सभी आठ टीमें भी ऐसा ही करेंगी। लगभग 18 देशों के करीब 1,000 खिलाड़ियों ने ऑक्शन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है, जिनमें पाकिस्तान के भी बड़ी संख्या में खिलाड़ी शामिल हैं।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ऑक्शन में फ्रेंचाइज़ी क्या रुख अपनाती है। हैरी ब्रूक जैसे खिलाड़ियों के समर्थन से यह स्पष्ट है कि क्रिकेट समुदाय का एक बड़ा हिस्सा खेल को राजनीति से अलग रखने की वकालत कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या द हंड्रेड वास्तव में वैश्विक और समावेशी टूर्नामेंट होने का दावा कायम रख पाता है या नहीं।
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