टीम इंडिया की लुटिया डुबाने में लगा BCCI, एक ही गलती दोहरा अपने पैरों पर मार रहा कुल्हाड़ी
Published - 29 Nov 2025, 09:17 AM | Updated - 29 Nov 2025, 09:19 AM
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Team India : भारत (Team India) की हालिया टेस्ट हारों ने टीम इंडिया के प्रदर्शन पर जितना प्रश्नचिन्ह लगाया है, उससे कहीं अधिक सवाल भारतीय क्रिकेट बोर्ड के फैसलों पर उठ रहे हैं।
पिछले एक साल में घर में दो बार टेस्ट सीरीज में वाइटवॉश होने के बाद उम्मीद थी कि बोर्ड टीम को नई दिशा देने के लिए कोचिंग स्तर पर कोई ठोस कदम उठाएगा।
लेकिन इसके उलट बीसीसीआई ने वही रास्ता चुना, जिसे अब फैंस और कई एक्सपर्ट भारतीय क्रिकेट के लिए आत्मघाती मान रहे हैं। बोर्ड ने गौतम गंभीर को हेड कोच बनाए रखने का फैसला करके खुद ही अपनी मुश्किलें बढ़ा ली हैं।
कोचिंग स्ट्रक्चर में बदलाव न करना टीम को और गहरे संकट में धकेल रहा है
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू धरती पर मिली हार ने टीम इंडिया (Team India) की रणनीति, तकनीकी तैयारी और मानसिक मजबूती सभी पहलुओं को उजागर कर दिया। लगातार मैचों में भारतीय बल्लेबाज़ों का ढह जाना, गलत प्लेइंग इलेवन, मौकों को भुनाने में नाकामी और रणनीतिक निर्णयों में कमजोरी स्पष्ट रूप से सामने आई।
यह वह समय था जब कोचिंग भूमिका की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। लेकिन बीसीसीआई ने इस गिरते ग्राफ को सुधारने के बजाय स्थिरता के नाम पर वही सेटअप बनाए रखने का निर्णय लिया।
यही वह कदम है जिसने बोर्ड की दूरदर्शिता पर सवाल उठा दिए। जिस दौर में टीम नए खिलाड़ियों, नई चुनौतियों और लगातार दबाव का सामना कर रही है, उस समय पुरानी सोच, खराब रणनीतियों और नतीजों से उबरने में नाकाम साबित हुए नेतृत्व को जारी रखना टीम की प्रगति को रोकने जैसा है।
गंभीर की कोचिंग फिलॉसफी और Team India के तालमेल में दिखाई कमी
कहा जा रहा है कि गंभीर टीम की कमज़ोरियों से परिचित हैं, लेकिन मैदान पर इसका कोई प्रभाव देखने को नहीं मिला।
बल्लेबाज़ी तकनीक में गिरावट, स्पिनर-फास्ट बोलर्स के गलत इस्तेमाल, प्लान बी की अनुपस्थिति और अहम समय पर ड्रेसिंग रूम की नर्वस बॉडी लैंग्वेज यह संकेत देती है कि कोचिंग आइडियाज़ खिलाड़ियों तक सही तरह नहीं पहुंच रहे।
इन लगातार चूकों के बाद भी बीसीसीआई का गंभीर पर भरोसा बनाए रखना खिलाड़ियों और टीम मैनेजमेंट के बीच असंतुलन को और गहरा कर सकता है। यह वह स्थिति है जहाँ टीम (Team India) को नेतृत्व परिवर्तन से नई ऊर्जा मिल सकती थी, पर बोर्ड ने वही गलती दोहरा दी—समय रहते बदलाव न करने की।
चयन की असंगतियों पर भी पर्दा डालता हुआ यह फैसला
चयन समिति पिछले एक साल में कई गलतियों के लिए निशाने पर रही है। गलत टीम संयोजन, फॉर्म की अनदेखी और पिच की समझ में चूक जैसी समस्याएँ बार-बार सामने आईं। ऐसे में कोचिंग स्टाफ और चयन समिति दोनों पर एक साथ पुनर्विचार होने की ज़रूरत थी।
लेकिन बोर्ड का यह तर्क कि दोनों जगह स्थिरता जरूरी है, उस वास्तविक समस्या को छिपा देता है कि यह स्थिरता टीम को नीचे ले जा रही है। खराब निर्णयों को लगातार मौके देना भविष्य की तैयारी नहीं, बल्कि अपने ही रास्ते में रोड़े डालने जैसा है।
गंभीर को पद पर बनाए रखने से होगा दूरगामी नुकसान
बोर्ड का यह दावा कि जल्दबाज़ी में बदलाव करना ठीक नहीं होगा, फिलहाल उस स्थिति से मेल नहीं खाता जिसमें टीम गुजर रही है। दो बार घरेलू वाइटवॉश, खिलाड़ियों की गिरती फॉर्म, रणनीतिक भ्रम और मनोवैज्ञानिक रूप से कमजोर प्रदर्शन यह साफ करता है कि समस्या गहरी है।
ऐसे अहम समय में अगर नेतृत्व में नई सोच नहीं लाई गई तो टीम इंडिया (Team India) 2027 वर्ल्ड कप तक एक कमज़ोर और अस्थिर टीम के रूप में ही बनी रह सकती है। कोच को समय देने की सोच समझ में आती है, लेकिन लगातार नाकामी के बाद भी वही रास्ता चुनना बोर्ड के लिए खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा साबित हो रहा है।
ऑथर के बारे में
यह लेखक Cricketaddictor का एक सदस्य है जो क्रिकेट से जुड़ी खबरों और विश्लेषण पर लिखता है।