BCCI काट रही रोहित-कोहली की सैलरी, पहले मिलते थे 7 करोड़, जानें अब दोनों को मिलेंगे कितने रूपये
Table of Contents
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) आने वाले सीज़न से सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। यह बदलाव सिर्फ़ संरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े और अनुभवी खिलाड़ियों की कमाई पर भी सीधा असर डालने वाला है।
बोर्ड का फोकस अब उन खिलाड़ियों पर है जो तीनों फॉर्मेट में लगातार उपलब्ध हैं। इसी रणनीतिक बदलाव के तहत सबसे ऊंची A+ कैटेगरी को हटाने का फैसला लिया जा सकता है, जिससे सैलरी स्ट्रक्चर पूरी तरह बदल जाएगा।
इसका सबसे बड़ा असर विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दिग्गजों पर पड़ता दिख रहा है, जो अब सीमित फॉर्मेट में ही भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
क्यों हटाई जा रही है A+ कैटेगरी
BCCI का मानना है कि A+ कैटेगरी उन खिलाड़ियों के लिए बनाई गई थी जो टेस्ट, वनडे और टी20 तीनों फॉर्मेट में भारत के लिए नियमित रूप से खेलते हैं। बोर्ड के सेक्रेटरी देवजीत सैकिया ने साफ किया है कि मौजूदा समय में इस क्राइटेरिया को पूरा करने वाले खिलाड़ी बहुत कम रह गए हैं।
कई सीनियर खिलाड़ियों ने अपने करियर के इस पड़ाव पर एक या दो फॉर्मेट पर ही फोकस करने का फैसला लिया है। ऐसे में A+ ग्रेड बनाए रखना व्यावहारिक नहीं रह गया। बोर्ड इसे प्रदर्शन और उपलब्धता से जुड़ा फैसला बता रहा है, न कि किसी खिलाड़ी के कद या योगदान को कम आंकने की कोशिश कर रहा हैं।
विराट कोहली और रोहित शर्मा पर सीधा असर
इस प्रस्तावित बदलाव के तहत विराट कोहली और रोहित शर्मा की सालाना रिटेनर सैलरी में बड़ी कटौती तय मानी जा रही है। अभी तक दोनों खिलाड़ी A+ ग्रेड में थे, जिसके तहत उन्हें 7 करोड़ रुपये सालाना मिलते थे। नए सिस्टम के लागू होने पर दोनों को B कैटेगरी में रखा जा सकता है, जहां रिटेनर अमाउंट 3 करोड़ रुपये है।
इसका मतलब है कि हर खिलाड़ी की पक्की BCCI इनकम में लगभग 4 करोड़ रुपये की कमी होगी। यह कटौती उनके अनुभव या स्टारडम की वजह से नहीं, बल्कि इस तथ्य के कारण है कि वे अब तीनों फॉर्मेट में उपलब्ध नहीं हैं।
नया सैलरी स्ट्रक्चर और बाकी खिलाड़ियों की स्थिति
BCCI के मौजूदा सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट स्ट्रक्चर के अनुसार A+ ग्रेड में 7 करोड़, A में 5 करोड़, B में 3 करोड़ और C में 1 करोड़ रुपये सालाना मिलते हैं, जिसमें मैच फीस शामिल नहीं होती। A+ कैटेगरी हटने के बाद टॉप लेवल A ग्रेड ही सबसे ऊंची कैटेगरी रह जाएगी।
जसप्रीत बुमराह , शुभमन गिल , अक्षर पटेल और यशस्वी जायसवाल जैसे खिलाड़ी इस A कैटेगरी में शामिल किए जा सकते हैं, क्योंकि वे बोर्ड की मल्टी-फॉर्मेट नीति में फिट बैठते हैं। वहीं, रवींद्र जडेजा जैसे अनुभवी ऑलराउंडर का कॉन्ट्रैक्ट भी नीचे आ सकता है।
BCCI की सोच और भविष्य की दिशा
इस पूरे बदलाव के पीछे BCCI की सोच साफ नजर आती है। बोर्ड भविष्य की भारतीय टीम को ऐसे खिलाड़ियों के इर्द-गिर्द तैयार करना चाहता है जो तीनों फॉर्मेट में निरंतर उपलब्ध रहें और टीम संयोजन में स्थिरता दें।
सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट को परफॉर्मेंस और कमिटमेंट से जोड़कर BCCI यह संदेश देना चाहता है कि आने वाले समय में बहु-फॉर्मेट क्रिकेटरों की अहमियत और बढ़ेगी। यह फैसला भले ही सीनियर खिलाड़ियों की सैलरी पर असर डाले, लेकिन बोर्ड इसे भारतीय क्रिकेट के लॉन्ग-टर्म प्लान का हिस्सा मान रहा है।