नए टेस्ट कैप्टन को चुनने से पहले ही सिलेक्टर ने छोड़ दिया पद, BCCI का नया नियम बना इसका कारण
Published - 10 Feb 2022, 06:40 AM

बीसीसीआई (BCCI) के चलते टीम इंडिया के एक सेलेक्टर ने अपना पद अचनाक छोड़ दिया है. वो चेतन शर्मा की अगुवाई वाली चयन समिति का हिस्सा थे. पद छोड़ने के पीछे दो वजह सामने आ रही है वो यह कि BCCI का नया नियम माना जा रही हैं. जिसके मताबिक कोई भी व्यक्ति 5 साल से ज्यादा वक्त तक क्रिकेट की सिलेक्शन कमिटी में शामिल नहीं रह सकता. उन्हें दिसंबर 2020 में वेट जोन से टीम इंडिया का सेलेक्टर चुना गया था. आइये बताते हैं क्या है पूरा मामला.
एबे कुरुविला ने पद से दिया इस्तीफा
भारत के पूर्व तेज गेंदबाज रहे एबे कुरुविला (Abey Kuruvilla) ने टीम इंडिया के सिलेक्टर पद को अचनाक छोड़ दिया है. भारत की मेंस सीनियर क्रिकेट टीम को चुनने वाली पंचों सदस्यों की टीम होती है. अब एबे कुरुविला ने इस कमेटी के मेंबर नहीं हैं. दरअसल, चयन समिति में हर जोन से एक सेलेक्टर होता है. भारत की मेंस सीनियर क्रिकेट टीम को चुनने वाली पांचों की इसी टोली में से एक, वेस्ट जोन के सिलेक्टर एबे कुरुविला (Abey Kuruvilla) ने अपना पद छोड़ा है.
भारत के पूर्व तेज गेंदबाज रहे एबे कुरुविला के पद से हटने के बाद BCCI को अब उनकी जगह नए सेलेक्टर की तलाश है. मुंबई के पूर्व तेज गेंदबाज कुरुविला को दिसंबर 2020 में वेस्ट जोन से टीम इंडिया का सेलेक्टर चुना गया था. उससे पहले वो जूनियर सेलेक्शन कमिटी के मुख्य चयनकर्ता था, जिस पद पर वो 4 साल रहे थे. उनके कार्यकाल में टीम इंडिया ने उन्मुक्त चंद की कप्तानी में साल 2012 में अंडर 19 वर्ल्ड कप का खिताब जीता था.
यह है BCCI का नया नियम
बीसीसीआई के नियम के अनुसार एक कमेटी में कोई सदस्य 5 साल से ज्यादा वक्त तक नहीं रह सकता है. जिसके चलते एबे कुरुविला (Abey Kuruvilla) को अपने पद को छोड़ना पड़ा. एबे कुरुविला को दिसंबर 2020 में वेस्ट जोन से टीम इंडिया का सिलेक्टर चुना गया था. मीडिया रिपोर्ट को अनुसार इनका कार्यकाल पूरा हो चुका है.
BCCI के अधिकारियों को बोर्ड के इस नए नियम के बारे में किसी को पता नहीं था. उन्हें भी इसका पता तब चला जब मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व सदस्य संजीव गुप्ता ने जनवरी में इसे लेकर शिकायत की. कुरुविला के पद छोड़ने के बाद भारतीय सेलेक्शन कमिटी में फिलहाल बस 4 सदस्य- चेतन शर्मा, सुनील जोशी, हरविंदर सिंह और देबाशीष मोहंत बचे हैं.
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