अपनी जिद्द पर अड़ा बांग्लादेश, अपनी मांग बदलने से किया इनकार, ICC को दे डाली चुनौती
Published - 21 Jan 2026, 11:14 AM | Updated - 21 Jan 2026, 11:21 AM
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आईसीसी (ICC) के आगामी बड़े टूर्नामेंटों को लेकर क्रिकेट जगत में घमासान मचा हुआ है। हालिया घटनाक्रम में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और आईसीसी के बीच तनातनी बढ़ गई है। सात फ़रवरी से भारत और श्रीलंका में टी20 विश्व कप 2026 की शुरुआत होने वाली है लेकिन अबतक बांग्लादेश की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
कुछ दिनों पहले अंदाजा लगाया जा रहा था कि बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को जगह मिल सकता है लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ जबकि रिपोर्ट्स के मुताबिक बताया जा रहा बाकी टीमों को बिना खेले एक एक अंक दे दिया जाएगा।
ICC के दबाव पर बांग्लादेश का जवाब
मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नजरुल ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश क्रिकेट टीम को अनुचित और अवास्तविक दबाव डालकर भारत में खेलने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। नजरुल ने यह भी स्पष्ट किया कि बोर्ड को अभी तक इस बात की कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है कि आईसीसी (ICC) उन्हें टूर्नामेंट से बाहर कर स्कॉटलैंड को शामिल करने की योजना बना रही है।
बांग्लादेश का मानना है कि उन पर बनाया जा रहा यह दबाव पूरी तरह से अतार्किक है। उन्होंने सीधे तौर पर आईसीसी (ICC) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वैश्विक संस्था बीसीसीआई के प्रभाव में आकर फैसले लेती है, तो यह खेल की भावना के खिलाफ होगा।
बांग्लादेश ने अपनी मांग को तर्कसंगत बताया है और कहा है कि वे अपनी शर्तों से पीछे नहीं हटेंगे। उनके अनुसार, किसी भी टीम को उसकी इच्छा के विरुद्ध ऐसे स्थान पर खेलने के लिए विवश नहीं किया जाना चाहिए जहाँ वे सहज महसूस न करें। यह रुख दिखाता है कि बांग्लादेश अब क्रिकेट की राजनीति में अपनी आवाज मजबूती से उठाने के लिए तैयार है।
ICC से हाइब्रिड मॉडल और वेन्यू परिवर्तन की मांग
अपनी बात को मजबूती से रखने के लिए बांग्लादेश ने पहले के उदाहरणों का सहारा लिया है। नजरुल ने याद दिलाया कि जब भारत ने सुरक्षा कारणों या अन्य राजनीतिक कारणों से पाकिस्तान जाने से इनकार कर दिया था, तब आईसीसी (ICC) ने लचीलापन दिखाते हुए आयोजन स्थल में बदलाव किया था या हाइब्रिड मॉडल को अपनाया था।
बांग्लादेश का तर्क है कि यदि भारत के लिए नियम बदले जा सकते हैं और वेन्यू शिफ्ट किए जा सकते हैं, तो उनके अनुरोध पर विचार क्यों नहीं किया जा रहा? उन्होंने आईसीसी को चुनौती देते हुए कहा कि दोहरा मापदंड नहीं अपनाया जाना चाहिए। बांग्लादेश ने स्पष्ट किया कि उन्होंने जो आयोजन स्थल बदलने का अनुरोध किया है, उसके पीछे ठोस और तर्कसंगत कारण हैं। वे इसे केवल एक मांग नहीं बल्कि अपना अधिकार मान रहे हैं।
नजरुल ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अतार्किक दबाव डालकर उन्हें भारत में खेलने के लिए मजबूर करना संभव नहीं होगा। इस बयान ने आईसीसी के सामने एक नई मुसीबत खड़ी कर दी है, क्योंकि अब समानता और निष्पक्षता के सवाल उठने लगे हैं।
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आईसीसी की दुविधा
बांग्लादेश के इस अड़ियल रुख ने आईसीसी (ICC) को एक कठिन परिस्थिति में डाल दिया है। एक तरफ जहां स्कॉटलैंड को शामिल करने की खबरें उड़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बांग्लादेश ने अपनी जगह छोड़ने से मना कर दिया है।
आईसीसी के लिए यह स्थिति इसलिए भी जटिल है क्योंकि उन्हें ब्रॉडकास्टर्स और प्रायोजकों के हितों का भी ध्यान रखना होता है, जो अक्सर भारत जैसे बड़े बाजार में मैचों के आयोजन के पक्ष में होते हैं। हालांकि, बांग्लादेश के कड़े प्रतिरोध और "चुनौती" ने यह संकेत दे दिया है कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो वे कानूनी या कूटनीतिक रास्ता भी अपना सकते हैं।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आईसीसी इस मामले को संवेदनशीलता से नहीं सुलझाती है, तो आगामी टूर्नामेंट का पूरा शेड्यूल प्रभावित हो सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें आईसीसी (ICC) के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वे बांग्लादेश की मांग मानकर वेन्यू बदलेंगे, या फिर कोई सख्त फैसला लेकर इस विवाद को और हवा देंगे? फिलहाल, बांग्लादेश अपनी जिद पर कायम है और गेंद अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के पाले में है।
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सौरभ भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से रेडियो एंड टेलीविजन पत्रकारिता में उच्च शिक्षा प्राप्... रीड मोर