राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से नवाजे गए 14 साल के वैभव सूर्यवंशी, जानें किन उपलब्धियों के चलते मिला ये ख़ास अवार्ड
Published - 26 Dec 2025, 12:39 PM | Updated - 26 Dec 2025, 12:40 PM
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Vaibhav Suryavanshi: जिस उम्र में बच्चे केवल एकेडमी में क्रिकेट का अभ्यास करते हैं और इस खेल की बारीकियों को सीखते हैं उस उम्र में बिहार के रहने वाले वैभव सूर्यवंशी ने विश्व क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बना ली है।
मात्र 14 साल के वैभव ने चाहे इंडिया अंडर-19 टीम हो या फिर इंडियन प्रीमियर लीग हर तरफ अपनी प्रतिभा की छाप छोड़ी है और यही कारण है कि अब उन्हें राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
चलिए आपको विस्तारपूर्वक बताते हैं कि वैभव (Vaibhav Suryavanshi) को किन उपलब्धियों के चलते यह खास अवार्ड मिला है, जिसे हासिल करने का सपना कई बच्चों का होता है।
दिल्ली में दिया गया अवार्ड
जहां एक ओर बिहार की टीम विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में दूसरा मैच खेल रही थी को उनके नन्हें स्टार वैभव सूर्यवंशी नई दिल्ली में स्थित विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के सम्मान से नवाजे जा रहे थे।
वैभव (Vaibhav Suryavanshi) को यह सम्मान भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों दिया गया। इस दौरान भारत के अलग-अलग जगहों से कई युवाओं और बच्चों को उनकी उपलब्धियों के लिए ये अवॉर्ड दिया गया। यह अवार्ड बच्चों को उनकी बहादुरी, खेल, संगीत या विज्ञान के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया है।
क्यों मिला Vaibhav Suryavanshi को ये अवॉर्ड?
बाएं हाथ के विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) को उस वक्त असली पहचान मिली, जब वह बिहार के लिए काफी छोटी उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलने के लिए मैदान पर उतरे थे। जनवरी में मुंबई के खिलाफ वैभव को पहला मैच खेलने का मिला और यही से उनकी किस्मत ने पलटी मारी।
यहां से उन्हें फिर इंडियन प्रीमियर लीग 2025 में चुना गया और 5-6 मैच बेंच पर बैठने के बाद उन्हें राजस्थान रॉयल्स ने गुजरात टाइटंस के खिलाफ मौका दिया। यहां पर वैभव (Vaibhav Suryavanshi) ने ईशांत शर्मा, राशिद खान, मोहम्मद सिराज जैसे धुरंधर गेंदबाजों के सामने केवल, 35 गेंदों पर तूफानी शतक ठोक दिया था।
वह इस लीग में सबसे तेज शतक ठोकने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने। उन्होंने 15 साल पुराना रिकॉर्ड सिर्फ 14 साल की उम्र में ध्वस्त कर दिया था। जबकि इसके बाद वैभव ने छोटी उम्र में तेजी से शतक ठोक विश्व क्रिकेट में अपनी अलग ही पहचान बनाई और यही कारण है कि उन्हें इस अवार्ड ने नवाजा गया है।
अरुणाचल के खिलाफ ठोका था शतक
विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में बिहार का प्रतिनिधित्व कर रहे वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) ने अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ सिर्फ 84 गेंदों पर 190 रन की शानदार पारी खेली थी। इसके बाद वह लिस्ट ए में सबसे तेज शतक लगाने वाले तीसरे बल्लेबाज बन गए थे।
जबकि इस प्रारूप में सबसे कम उम्र में शतक ठोकने वाले पहले बल्लेबाज बने। उनसे पहले ये कारनामा जहूर इलाही ने 15 साल 209 दिन की उम्र में किया था, जो कि 1986 में रेलवे के खिलाफ आया था। लेकिन अब ये रिकॉर्ड युवा वैभव सूर्यवंशी के नाम पर दर्ज हो चुका है।
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